Thursday, May 22, 2014

హిందీ...బహాజో రాధేగోివింద్

गणपती मोहे तुम्ही गति 
देयी सुमति -करू मै तेरी स्तुती ॥ गणपति ॥ 

तुम बिना। क़ाज नहीं होना
मै ने नहीं जाना , मै  मूरख था ना ॥ तुम ॥ 

लम्बोदर ना ना  , रूठ ना जाना 
मोदके लाना  , प्रेम से तुम खाना  ॥ लंबोदर ॥ 
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भजो राधे -गोविंद 
भजो जसोदा  के  नन्द 
देवकी नन्द-नन्दन 
गोपाला। .हा। … ॥ भजो ॥ 

हरी राधा के अंग  ,
गोपिकावों  के संग 
रास-लीला रचे 
ब्रिज-बाला  हां ....... ॥ भजो ॥ 

मोर -मुकुटंन के धार  , कान्हा 
माखन का चोर , मेरा 
जीवन का डोर  , गोपाला 

प्रभु दीनजन -बंधु  , सबका 
दुःख करे भांग , जग में 
माया के रंग , गोपाला। … 

जग में माया के रंग 
गोपाला…  हां   ॥। भजो ॥ 
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lyrics...
p. Jagadiswari murthy.
Kalyan.


  





గణపతి మొహెతుం గతి

              ।  भजन गीत। 
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 गणपती गणपति - मोहे तुम  गति 
देयि  सुमति -करू मै तेरी स्तुती ॥ गणपति ॥ 

तुम बिना।।।।।  क़ाज नहीं होना
मै ने नहीं जाना , मै  मूरख था ना ॥ तुम ॥ 

लम्बोदर ना ना  , रूठ ना जाना 
मोदके लाना  , प्रेम से तुम खाना  ॥ लंबोदर ॥ 
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भजो राधे -गोविंद -भजो 
जसोदा  के  नन्द। .... 
देवकी नन्द-नन्दन 
गोपाला। हे  … ॥ भजो ॥ 

हरी राधा के अंग  -,
गोपिकावों  के संग 
रास-लीला रचे 
ब्रिज-बाला  हां ....... ॥ भजो ॥ 

मोर -मुकुटंन के धार  , कान्हा 
माखन का चोर , मेरा 
जीवन का डोर  , गोपाला 

प्रभु दीनजन -बंधु  , सबका 
दुःख करे भांग , जग में 
माया के रंग , गोपाला। … 

जग में माया के रंग 
गोपाला…  हां   ॥। भजो ॥ 
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नाचे नाचे रे गणपती 
नंदलाला  हे नंदलाला 
तूही  चल जल्दी छोड़ 
दूध के प्याला… 

पावों  मे  घुंगरू  
कद से छोटे गुरू 
छोटी छोटीसी नैनन के 
गज मुख बाला ॥ नाचे ॥ 

मूषक जी निकल पड़े 
सज-धज के ,  राय 
गणपति  कि नाचन में 
ढोल बजाने… 

ना शक- संकोच बिना 
फन  को  फैलाके 
काला नाग चली नागिन संग 
पुंगी  बजाने। … 

आया है चाँद , प्यारी 
सखियों  के संग 
सब सितारों ने चमक लाई 
आँगन में  ॥ नाचे ॥ 

सोनेकी थाली में 
सूंढ़ घुमाके  ……… 
चलें  गणपती स्फूर्ती से 
लड्डु  चुराने । .... 

घन-काया  ,गण-राया 
चुप के छुपाके। … 
भागें  भक्तों की  थालिमे -
मोदक को चुराके…। 

नाच ने की ढंग 
बालपन की ये रंग 
प्यारा - प्यारा सा लगेरे 
सब के नयनन  को   ॥ नाचे ॥ 

चोरी के मामले में 
तूभी क्या कम … 
हमरि नजरों  में दोनोंकी 
कारनामें  सम। .... 

हारे है हम पूरे 
शहर , पूरा गाँव 
नन्द -लाला और गणपती कि 
देख बालपन… 

नट-खट प्यारे 
नन्द लाला न्यारे 
बाळ  गणराया तुमरि साया 
चाहेरे हरदम  ॥  नाचे ॥ 
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Tuesday, May 20, 2014

హిందిీ సాయి కధామ్రుతం

श्री साईं कथामृत 

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सुनो-सुनो श्री  साई के गुण ,
सीख सबूरी , श्रद्धा की ,
सुन इनकि  महिमा  चमतकार की 
भरी कहानी , प्यार की ॥ 

शिरिडी गांव में छोटासा इक 
बालक बैठा छाँव में 
नीम -व्रुक्ष की  छायाथा , वो 
बड़ी मग्न  , तप भाव में 
देखने लगे शिरिडी वासी निस-दिन 
सुबह-और शाम में 
खाना -पीना पूछता नहीं 
आँख खोल कुछ बोलता नहीं ॥  सुनो  ॥ 

बोलो सांई राम  , बोलो सांई श्याम 
शरण में आओ सख ,सब बंधू 
शिरिडी उनके धाम ॥ 

पूजारीके स्वप्न में  जोभी 
बोले भगवन खंडोबा 
खोद के धरती देखा ,सुन्दर 
कमरा एक उजालासा 
तप; कार्य की जगह था वो  , ओर 
जोगी बालक रूपीथा 
बालक नहि  भगवंता है ,  ये 
बड़ी खुशीकी बात थी ॥   बोलो साईं राम। ……

इक दिन बालकदृस्य होगया
पूरा गाँव हताश था । 
सालों -सॉल  गुजरगये पर 
वापस नहीं वो आयेथे  । 
बीते दिन को भूलगये सब 
अपने काम में मस्त थे 
संत -जनोकी बात बड़ी है 
जानेना क़ोई ,  जवाब न था ॥ बोलो साई राम। .... 

धूप-गाँव में चाँदपाटील 
अपने घोड़ा जो खोये । 
ढूंढने लगे सारादिन  , और 
परेशान से ओ रोये । 
साधू  रूपी  संत बताया 
उसी जगामे घोड़ा था । 
मन ही मनमे चकित हुवा और 
भरी खुशी से नमन किया ॥  बोलो साई राम ----

सिद्ध -पुरुष महिमाको जाने 
पाटिल  , साधू सच्चा था । 
अतिथि रूप सादर से लाने 
सोचा  , मनकी  इच्छाथा । 
बात मानकर निकले साँई  
धन्य पाटील जन्म था । 
सांई चरण जो पडी गांवमें 
पावन द्वारकमाई था ॥ बोलो साई राम ---

चारों ओर फैलाथा महिमा 
सांई के गुण -गान का । 
भक्त जनोसे भरी साई - दरबार 
मंदिर व हि  मश्चिद् था । 
हिंद , मराठी ,सिक्क , इसाई 
सब मिल शरण में आतेथे । 
भेद-भाव नहि किया साईने 
सब मत को अपनाया था ॥ बोलो साई  राम ----

खण्ड -योग के सिद्धी पायी 
साई संत फकीर थे । 
भरी आग में हाथ डाल , देतेथे 
विभूति  भगवंता । 
निस-दिन जलती धुनिकी विबूदी 
रोग निवारक साधन था। 
कष्ट मिटाकर करुण दिखाकर 
साई सद्गुरु हसते थे ॥   बोलो साई राम---

पानीसे वो दीप जलाके 
चमतकार दिखलाताथा । 
नमक भरी पानीको छूकर 
मीठा नीर बनाताथा ॥ 
दान-धर्म कर दया दिखाकर 
पावन पालन करताथा । 
छत पे झूला बाँधके बाबा 
बड़े आरामसे सोताथा॥ बोलो साई राम---

चक्की में गेंहू को पीसके 
सबका पाप धुलाताथा । 
कुष्ट रोग , कलरा ,बुखार 
बूदीसे ठीक वो करताथा । 
प्लेग -रोग  को रोकने बाबा 
आटा गाँवमे छिडकताथा । 
राजभोगि  , बैरागी बनकर 
भीख मांगके  खाताथा॥ बोलो साई राम---- 

बाईजाबाई-मय्या ,तात्या 
आत्माराम और बापाजी 
दासगणू , कपर्दी , पाटिल 
सब साई के भक्त थे । 
उनके नजर में सांई रक्षक 
मात-पिता , गुरु , संत थे । 
प्यार भरोसा  रखवालोंकी -
बाबा सच्चे साथी थे ॥  बोलो साई राम --

साई महिमापरम्पार है 
मायी द्वारक तीर्थ  बनी । 
शिरिडी क्षेत्र की दरसन कर लो 
गोरे , काले , गरीब , धनी 
साई चरण में गंगा -जमुना 
तीर्थ बहे पावन है  जनी  ,
मानव रूपमे माधव बनकर 
मन जीते साई धनी ॥  बोलो साई राम---

महिमा  बड़ी सांई कि , धन्य हम 
सारे जन -गण धरती का 
धन्य हुयी राधाकृष्ण माई 
संस्थान बनाया साईका 
शिरिडी में स्थापित हुई  मूर्ती 
साईकी -सद्गुरुजीकी 
मंगलमूरत महिमा  भरी पुरि 
गूँज उठें  जयकार की  ॥  बोलो सांई राम---

सांई उत्सव शुरू हुवा तब 
भरी चावड़ी रोशनसे 
शोभायात्रा चावडि  पहुंचा 
सब थके भूख और प्यास से 
अन्नदान तब किया साई ने 
खुद अपनेही हाथोंसे 
ग्यारह सूत्र की गीता महिमा 
कहा सांई बड़ी प्यार से  ॥ बोलो साई  राम ----

नवनिधि दाता  नो सिक्कोंमें 
बांटके भक्ती -भाव के रंग 
बूटीभवन में समाधि-इच्छा 
प्रकटकिया सब साथी संग 
आँख मूँदकर  , छोड़ शरीर को 
ली समाधि साँई के अंग 
समाधि में से बोले सांई 
सदा रहेंगे हमारे संग ॥  बोलो सांई राम -----

अखिलकोटि ब्रह्माण्ड नायका 
सकल पाप हर  सात संता 
राज राज श्री योगिराज -
परब्रह्म  साँई  श्री गुणवन्ता 
समर्थ सद्गुरु साईनाथ के 
शरण में आवो  सब संता 
जै बोलो मंगलमूरत को 
साँई नरायण भगवन्ता  ॥  बोलो साँई राम-----

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             मङ्गलं आरती 
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मंगलम्  श्री साइनाथ   
मंगलम् श्री  दीननाथ 
मङ्गलाकार  सांई 
सर्व मङ्गला  ॥ 

द्धारका पुरि  निवास 
नारदादि पूजितेस 
निर्मलानन्द रूप 
नित्य मङ्गला ॥ 

शिरिडि क्षेत्र पुरपावन 
सर्वधर्म सम भावन 
सकल लोक सुख कामन 
सांई मङ्गला ॥ 

राजाधिराज अखिल 
ब्रह्माण्ड नायकाय 
कोटिजन सुपूजिताय 
भूरि मङ्गला ॥ 

सर्व रोग हर शुभाय 
नित्याग्निहोत्र  जनित 
पावन बाभूति भूष 
सर्व मङ्गला ॥ 

लोक-शोक  नाशकाय 
सार-सुम सु पूजिताय 
सौम्य रूप सत्य पाल 
शान्ति मंगलम् -साई 
शान्ति मंगलम -साई 
शान्ति मङ्गलम्  ॥ 
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           साँई  पञ्चारती 
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मङ्गलं श्री सांईनाथ  
मधुर  भाषिता। ....
आकार-निराकार 
अखिलपालका। …… 

मंगलम्  श्री सांई तेज 
अखिलपोषका। … 
निराधार के आधार 
नित्य निर्मला…। 

मंगलम्  श्री साईनाथ 
शिरिडि  श्रीकरा। … 
सत्गुरू -संत रूप 
श्री महेश्वरा… 

मङ्गलम्  श्री सांईनाथ 
द्वारकेस्वारा। … 
आर्तत्राण-परायणा  
अभयदायका.... 

मङ्गलम्  श्री  सांईनाथ 
मोक्ष साधका। … मात्र 
श्रद्धा-सबूरी , भक्ति 
मुक्ति दायका…॥   मङ्गलम् ॥ 
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హిందీ..సుందరకాండ

संक्षिप्त सुंदर काँड 

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बड़ी देरसे आयेहैं श्री  हनुमान जी 
और मीठीसी खबर लाये हनुमान  जी । 
सुन रे बंधू  , बहन  ,  भाभी , मय्या 
सीता मय्या की खबर  खुशी की है  भैय्या ॥ 

राम लक्ष्मण जानकी।
जय बोलो हनुमान की ॥ 

सागर को पार किया  हनुमा अपने दम 
नगर रक्षकि खलु लंखिणी को  करके ख़तम  । 
लंका नगरी में किया पूरी छान - बीन  ,
शंका छोड़ नाचे मय्याकी रूप को पहचान । 

नमन किया मय्याको मनही - मन 
माकि दुःस्थिति को देख नामि  हुए कपि नयन ॥ 

राम लक्ष्मण जानकी 
जय बोलो हनुमान की ॥ 

माताकी सामने लघु -रूप हनुम बन , 
भाव -भक्ती से गानेलगे ,  रामके गुण -गान । 
सुनके मय्या चकित नयन , वीर को पेहचान ,
दिव्य चूड़ामणि मुद्रिक दी , हुयी  अति प्रसन्न ॥ 

नाचने लगे , हनुमा डोलने लगे  , 
सीता -रामजी के मिलन सोच डोलने लगे ॥ 

राम , लक्ष्मण , जानकी 
जय बोलो हनुमान की ॥ 

भूख बढ़ी , प्यास बढ़ी  हनुमंत को ,
देखसोक वन की सुन्दर फल , फूल पेड़ को । 
ढेरों फल खाये ओर पेड़ गिराये  , 
सुन्दर लंका-वन सूरत को स्वयम  उजाडे ॥ 

लंका के दानवोंको करके ख़तम , हनुमा 
रावण को दी संदेश भरी चेतावन ॥ 

राम , लक्ष्मण , जानकी 
जै बोलो हनुमान की ॥ 

काण्ड सुन दण्डक-वन  रावण रूठा ,
दण्ड देनेकी ठान वो  हनुमंत पे टूटा । 
राम-दूत  मारुती कि  पूछ जलाने , आज्ञा 
देके हँसा , राक्षस संग ठाहके लगाके ॥ 

ग़ुस्से में धुम  , लंका-पुरी  घूम-घूम ,
हनुमा राख किया लंका , और नाचे झूम -झूम ॥ 

राम , लक्ष्मण  , जानकी ,
जय बोलो हनुमानकी ॥ 

बड़ा भला काम किया पवन-पुत्र ने 
लगी रावण के मनमे डर की छाया सताने । 
राम कि सन्देश भरी खबर सुनाके 
किया नमन सादर सीता को शीश झुकाके ॥ 

रावण को छेड़  , लंका -पूरी छोड़ -छाड़ 
निकले किष्किन्धा , निश्च्य मन नन्द-केसरी ॥ 

राम , लक्ष्मण , जानकी 
जय बोलो हनुमान की ॥ 

सीता की खबर सुन के ,राम जी खड़े ,
किया आलिंगन ,हनुमान से बड़े प्यार से । 
नमी-आँख , थमी-हाथ , पूछें बार-बार ,
सीता मय्या की खबर सुने राम बार-बार ॥ 

आनंद बड़ा  ,  खुशी रांग  चढ़ा ,
सब --झूम-उठे , सफल सुन्दर काण्ड है बड़ा ॥ 

राम , लक्ष्मण , जॉनकी ,
जय बोलो हनुमान की ॥ 

मङ्गल भवन ,अमंगल कारी। …… 
सुन्दर काण्ड श्री हनुमान की बड़ी न्यारी ॥ 
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                       SREE SAI KEERTHANAM

                                   శ్రీ సాయి కీర్తనలు . 
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                तेरे दरपे आके खड़ाहुः  कबसे। …
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- तेरे  दरपे    आके खड़ाहु  कबसे                                      
 आके दरस दिखावो  जी 
तेरे नामको जपते जपते होगया 
               मै  तेरा दिवाना जी !!                    

तेरे लिये मै  छोड़ा सबकुछ 
     तेरेलिये  अब  जीना है !! तेरे !!

तेरी लीला सब जग जाने 
      जानन कोई ऐसा न था ,
तेरे छाँव में जोकोयी आया 
हर सुख पाया झूठ न था  !!
तेरि सूरत में है इतनी शक्ती 
                साँई जी। .... 
द्वारक मायी दुखियारोंकी  
                 छाया जी.……… !! तेरे !!

शिरिडी में तू जबसे आया 
छूटगयी  सब की मोहमाया ,
जात -पात  की बातको भूला 
सब मिल   भाई-चारा  निभाया 

मंदिर-मश्चिद्  तेरे दरपे 
                   साँई जी। … 
श्रद्धा -सबूरी से तुम्हे पावू 
                   साँई  जी। …… !! तेरे !! 
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                 मेरे दिलकी बात बतानी। .... 

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मेरे दिलकी बात बतानी तुमसे 
    ओम सांई राम। ....... सुनके 
रूठनजाना  सजान  देना 
                ओम साई राम। .... 
ओम साई राम। … मेरे साई राम 
ओम साई राम। …। प्यारे साई राम !!

कितना मूरख मनका हूुं मैं 
              चंचल दिल्का  मारा था 
अपना-पराया जानना मैंने 
             सबको ही रुलाया था 
जानना पाया ज्ञानका शक्ति 
     दाल-दाल में गिर रोया था। …।! २ बार !!
अब तेरि शरण में आया हूँ 
मुझे दूरना करना साईजी। .... !! दिलकी !! 

धन की  लालच बड़ीथी  मन में 
अच्छा सोच न था। …। 
पाप-पुण्य  का भेद न जाना 
सच्चा दिलका न था। .... 
जोश में मैने   होश जो खोया 
भाई-बंधु के दिल जो तोड़ा। .!! २ बार !!
बीते दिन  पाप   …………   
 बीते दिन पाप ऑसुओ  में 
 बहगये  साई राम … 
मेरे कर्मोकाफल  भोगने को 
तैय्यारहुँ  सांई राम। ……… !! 

ओम साई राम। ....... मेरे साई राम 
ओम साई राम। ……। प्यारे साई राम !! 
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           तुम्हीहो माता -पिता। … 
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    तुम्हीहो माता , पिता तुम्हीहो 
तुम्हीहो बंधू      मेरे साई राम !
तुम्हारा जैसा कोई नहीं  है    
मेरे लिए तू सांई - भगवान !!

तुम्हारे दिलमें  हरेक के लिए 
भरीहै ममता - बनी है समता !२ बार !
पराये  अपनों का भेद ना करके 
बनाके रख्खा है  शांति दाता !!तुमीहो !! 

तुम्हारे दरपे… सब धार्मोंका 
है ऐक न्योता --है एक नाता  ! २ बार !
मंगल- मूरत -  सुन्दर सूरत 
तुझे जो ध्याता   वो सब ही पाता !!तुमीहो! 
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          युग युग में धरती पे  आके। …… 
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युग युग से धरती पे आकर 
मानव बनके महिमा दिखाया 
साधु - संत ,  सतगुरु के रूप में 
ज्ञान क़ ज्योत जलाया था., साँई। … ! ज्ञान !

आस -निरास  कि  मारा यारा 
शरण लिया तेरे चरणन में 
तेरे मनमें  करुणपरम्पार 
गिरे को थामके - गले लगाया  
अपना -पराया भेद न कर के 
सब का दर्द अपनाताथा। …  . ! २ बार ! 
दुःख-और दर्द मिटाके उन्को 
फूल के राह दिखाताथा , . तूने   !२बार !

हे जग दाता  क्या है नाता 
सब का चिंतन तूने किया 
प्लेग रोग -पीड़ा को तूने 
बूदी सेही  मुक्त किया। .......
जात -पात की बात न था और
नहीं कोई अंतर दिखलाता। …… 
सबीको अपना मान के तूने 
परमाद्भुत दिखलाताथा  !!२ बार !

श्रद्धा -सबूरी नाम का पैसा 
तूने मांगके लेताथा 
उसकि प्रती तू हर इक पल-पल 
स्नेह बाँट के फिरता था। …  
द्वारक मायी  पावन छाँव में 
सब धर्मों का साथ निभाया। ……… 
राम -रहीम ,  अल्लाह -के रूप में 
भगवन बनके तू दरस दिखाया !२बार!
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          सिरपे पगड़ी लाल-लाल। । 

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सर पे पगड़ी लाल-लाल धर 
कफनी लंबा  डाल (कमाल )
हो तेरा क्या केहना। …… 
सुन्दर मुखड़ा प्यारि  -प्यारि 
होठोंपे हँसी का मेल 
हो तेरा का केहना। .... !!

कहासे आया इस दुनियामे 
रेह्ते तुम हो कहाँ। …?
कोइना जाने, बाल रूप में 
पाया तुम्को  यहाँ ……
नीम वृक्षा की साया में तुम 
किया बड़ी चमत्कार 
हो तेरा क्या केहना। !!

गाँव -गाँव  मिल आया तेरे 
लियेही समझपना। ....... 
साई-सांई  पुकारे ,उनकी 
पूरि हुई सपना.... 
सब का दिलमें छाया हो तुम 
शिरड़ी में बसके 
हो तेरा क्या केहना। 

द्वारक मायी  पुण्य धाम बनि 
तेरे कारण सांई। …… 
शिर्डी वालों की नसीब  बड़ी 
भगवन को ही पाये। 
सांई दरबार में मंदिर- मश्चिद् 
सारे धर्म यहाँ। 
हो तेरा क्या केहना। ....... !! 
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पालकी में बैठे  बाबा। … 
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पालकी में बैठे बाबा 
देखो उनकी शान। … 
मोर-मुकुट धर कृष्ण-मुरारि -
पधारे शिरिडी धाम…। . 

झूमो -नाचो सखियोंके संग 
गोपी बनके बेहना। …। 
भाई ,बंधु ,सखा है सब मिल-
मनावो उत्सव अपना.... । 

( ग्रूप )आज बाबा कि पालकी में 
रंग़भिरंगी  फूल। …। 
हीरे -मोती जड़े है उसकी 
कीमत है अनमोल। …। !!

अंग-अंग भीगे हैं रंगमे 
होली की है समा.... 
भांग कि रंग जो चढ़गयी यारों 
झूमो -नाचो यहाँ.... 
बाबा हँसने लगे -
खिल-खिलाने लगे 
आज शिरडी के हर गली 
बेहेक ने लगे। .... .!!  आज बाबाकि !!
                                   ( ग्रूप )
पकवानोंकी  खुशबू  से 
सारा द्वारक महके। …। 
अपने हाथों खिला-खिलाके 
बाबा प्यार जो बरसे। । 
उस बारिस में भीगे सारे 
जुड़ इक बंधन से…। 
एकहि रंग में नाता जोड़े 
सज्जन हो दिल से।  !! आज बाबाकी !! 
__________________( ग्रूप )____
                                                             
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