Tuesday, May 20, 2014

హిందీ..సుందరకాండ

संक्षिप्त सुंदर काँड 

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बड़ी देरसे आयेहैं श्री  हनुमान जी 
और मीठीसी खबर लाये हनुमान  जी । 
सुन रे बंधू  , बहन  ,  भाभी , मय्या 
सीता मय्या की खबर  खुशी की है  भैय्या ॥ 

राम लक्ष्मण जानकी।
जय बोलो हनुमान की ॥ 

सागर को पार किया  हनुमा अपने दम 
नगर रक्षकि खलु लंखिणी को  करके ख़तम  । 
लंका नगरी में किया पूरी छान - बीन  ,
शंका छोड़ नाचे मय्याकी रूप को पहचान । 

नमन किया मय्याको मनही - मन 
माकि दुःस्थिति को देख नामि  हुए कपि नयन ॥ 

राम लक्ष्मण जानकी 
जय बोलो हनुमान की ॥ 

माताकी सामने लघु -रूप हनुम बन , 
भाव -भक्ती से गानेलगे ,  रामके गुण -गान । 
सुनके मय्या चकित नयन , वीर को पेहचान ,
दिव्य चूड़ामणि मुद्रिक दी , हुयी  अति प्रसन्न ॥ 

नाचने लगे , हनुमा डोलने लगे  , 
सीता -रामजी के मिलन सोच डोलने लगे ॥ 

राम , लक्ष्मण , जानकी 
जय बोलो हनुमान की ॥ 

भूख बढ़ी , प्यास बढ़ी  हनुमंत को ,
देखसोक वन की सुन्दर फल , फूल पेड़ को । 
ढेरों फल खाये ओर पेड़ गिराये  , 
सुन्दर लंका-वन सूरत को स्वयम  उजाडे ॥ 

लंका के दानवोंको करके ख़तम , हनुमा 
रावण को दी संदेश भरी चेतावन ॥ 

राम , लक्ष्मण , जानकी 
जै बोलो हनुमान की ॥ 

काण्ड सुन दण्डक-वन  रावण रूठा ,
दण्ड देनेकी ठान वो  हनुमंत पे टूटा । 
राम-दूत  मारुती कि  पूछ जलाने , आज्ञा 
देके हँसा , राक्षस संग ठाहके लगाके ॥ 

ग़ुस्से में धुम  , लंका-पुरी  घूम-घूम ,
हनुमा राख किया लंका , और नाचे झूम -झूम ॥ 

राम , लक्ष्मण  , जानकी ,
जय बोलो हनुमानकी ॥ 

बड़ा भला काम किया पवन-पुत्र ने 
लगी रावण के मनमे डर की छाया सताने । 
राम कि सन्देश भरी खबर सुनाके 
किया नमन सादर सीता को शीश झुकाके ॥ 

रावण को छेड़  , लंका -पूरी छोड़ -छाड़ 
निकले किष्किन्धा , निश्च्य मन नन्द-केसरी ॥ 

राम , लक्ष्मण , जानकी 
जय बोलो हनुमान की ॥ 

सीता की खबर सुन के ,राम जी खड़े ,
किया आलिंगन ,हनुमान से बड़े प्यार से । 
नमी-आँख , थमी-हाथ , पूछें बार-बार ,
सीता मय्या की खबर सुने राम बार-बार ॥ 

आनंद बड़ा  ,  खुशी रांग  चढ़ा ,
सब --झूम-उठे , सफल सुन्दर काण्ड है बड़ा ॥ 

राम , लक्ष्मण , जॉनकी ,
जय बोलो हनुमान की ॥ 

मङ्गल भवन ,अमंगल कारी। …… 
सुन्दर काण्ड श्री हनुमान की बड़ी न्यारी ॥ 
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                       SREE SAI KEERTHANAM

                                   శ్రీ సాయి కీర్తనలు . 
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                तेरे दरपे आके खड़ाहुः  कबसे। …
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- तेरे  दरपे    आके खड़ाहु  कबसे                                      
 आके दरस दिखावो  जी 
तेरे नामको जपते जपते होगया 
               मै  तेरा दिवाना जी !!                    

तेरे लिये मै  छोड़ा सबकुछ 
     तेरेलिये  अब  जीना है !! तेरे !!

तेरी लीला सब जग जाने 
      जानन कोई ऐसा न था ,
तेरे छाँव में जोकोयी आया 
हर सुख पाया झूठ न था  !!
तेरि सूरत में है इतनी शक्ती 
                साँई जी। .... 
द्वारक मायी दुखियारोंकी  
                 छाया जी.……… !! तेरे !!

शिरिडी में तू जबसे आया 
छूटगयी  सब की मोहमाया ,
जात -पात  की बातको भूला 
सब मिल   भाई-चारा  निभाया 

मंदिर-मश्चिद्  तेरे दरपे 
                   साँई जी। … 
श्रद्धा -सबूरी से तुम्हे पावू 
                   साँई  जी। …… !! तेरे !! 
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                 मेरे दिलकी बात बतानी। .... 

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मेरे दिलकी बात बतानी तुमसे 
    ओम सांई राम। ....... सुनके 
रूठनजाना  सजान  देना 
                ओम साई राम। .... 
ओम साई राम। … मेरे साई राम 
ओम साई राम। …। प्यारे साई राम !!

कितना मूरख मनका हूुं मैं 
              चंचल दिल्का  मारा था 
अपना-पराया जानना मैंने 
             सबको ही रुलाया था 
जानना पाया ज्ञानका शक्ति 
     दाल-दाल में गिर रोया था। …।! २ बार !!
अब तेरि शरण में आया हूँ 
मुझे दूरना करना साईजी। .... !! दिलकी !! 

धन की  लालच बड़ीथी  मन में 
अच्छा सोच न था। …। 
पाप-पुण्य  का भेद न जाना 
सच्चा दिलका न था। .... 
जोश में मैने   होश जो खोया 
भाई-बंधु के दिल जो तोड़ा। .!! २ बार !!
बीते दिन  पाप   …………   
 बीते दिन पाप ऑसुओ  में 
 बहगये  साई राम … 
मेरे कर्मोकाफल  भोगने को 
तैय्यारहुँ  सांई राम। ……… !! 

ओम साई राम। ....... मेरे साई राम 
ओम साई राम। ……। प्यारे साई राम !! 
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           तुम्हीहो माता -पिता। … 
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    तुम्हीहो माता , पिता तुम्हीहो 
तुम्हीहो बंधू      मेरे साई राम !
तुम्हारा जैसा कोई नहीं  है    
मेरे लिए तू सांई - भगवान !!

तुम्हारे दिलमें  हरेक के लिए 
भरीहै ममता - बनी है समता !२ बार !
पराये  अपनों का भेद ना करके 
बनाके रख्खा है  शांति दाता !!तुमीहो !! 

तुम्हारे दरपे… सब धार्मोंका 
है ऐक न्योता --है एक नाता  ! २ बार !
मंगल- मूरत -  सुन्दर सूरत 
तुझे जो ध्याता   वो सब ही पाता !!तुमीहो! 
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          युग युग में धरती पे  आके। …… 
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युग युग से धरती पे आकर 
मानव बनके महिमा दिखाया 
साधु - संत ,  सतगुरु के रूप में 
ज्ञान क़ ज्योत जलाया था., साँई। … ! ज्ञान !

आस -निरास  कि  मारा यारा 
शरण लिया तेरे चरणन में 
तेरे मनमें  करुणपरम्पार 
गिरे को थामके - गले लगाया  
अपना -पराया भेद न कर के 
सब का दर्द अपनाताथा। …  . ! २ बार ! 
दुःख-और दर्द मिटाके उन्को 
फूल के राह दिखाताथा , . तूने   !२बार !

हे जग दाता  क्या है नाता 
सब का चिंतन तूने किया 
प्लेग रोग -पीड़ा को तूने 
बूदी सेही  मुक्त किया। .......
जात -पात की बात न था और
नहीं कोई अंतर दिखलाता। …… 
सबीको अपना मान के तूने 
परमाद्भुत दिखलाताथा  !!२ बार !

श्रद्धा -सबूरी नाम का पैसा 
तूने मांगके लेताथा 
उसकि प्रती तू हर इक पल-पल 
स्नेह बाँट के फिरता था। …  
द्वारक मायी  पावन छाँव में 
सब धर्मों का साथ निभाया। ……… 
राम -रहीम ,  अल्लाह -के रूप में 
भगवन बनके तू दरस दिखाया !२बार!
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          सिरपे पगड़ी लाल-लाल। । 

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सर पे पगड़ी लाल-लाल धर 
कफनी लंबा  डाल (कमाल )
हो तेरा क्या केहना। …… 
सुन्दर मुखड़ा प्यारि  -प्यारि 
होठोंपे हँसी का मेल 
हो तेरा का केहना। .... !!

कहासे आया इस दुनियामे 
रेह्ते तुम हो कहाँ। …?
कोइना जाने, बाल रूप में 
पाया तुम्को  यहाँ ……
नीम वृक्षा की साया में तुम 
किया बड़ी चमत्कार 
हो तेरा क्या केहना। !!

गाँव -गाँव  मिल आया तेरे 
लियेही समझपना। ....... 
साई-सांई  पुकारे ,उनकी 
पूरि हुई सपना.... 
सब का दिलमें छाया हो तुम 
शिरड़ी में बसके 
हो तेरा क्या केहना। 

द्वारक मायी  पुण्य धाम बनि 
तेरे कारण सांई। …… 
शिर्डी वालों की नसीब  बड़ी 
भगवन को ही पाये। 
सांई दरबार में मंदिर- मश्चिद् 
सारे धर्म यहाँ। 
हो तेरा क्या केहना। ....... !! 
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पालकी में बैठे  बाबा। … 
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पालकी में बैठे बाबा 
देखो उनकी शान। … 
मोर-मुकुट धर कृष्ण-मुरारि -
पधारे शिरिडी धाम…। . 

झूमो -नाचो सखियोंके संग 
गोपी बनके बेहना। …। 
भाई ,बंधु ,सखा है सब मिल-
मनावो उत्सव अपना.... । 

( ग्रूप )आज बाबा कि पालकी में 
रंग़भिरंगी  फूल। …। 
हीरे -मोती जड़े है उसकी 
कीमत है अनमोल। …। !!

अंग-अंग भीगे हैं रंगमे 
होली की है समा.... 
भांग कि रंग जो चढ़गयी यारों 
झूमो -नाचो यहाँ.... 
बाबा हँसने लगे -
खिल-खिलाने लगे 
आज शिरडी के हर गली 
बेहेक ने लगे। .... .!!  आज बाबाकि !!
                                   ( ग्रूप )
पकवानोंकी  खुशबू  से 
सारा द्वारक महके। …। 
अपने हाथों खिला-खिलाके 
बाबा प्यार जो बरसे। । 
उस बारिस में भीगे सारे 
जुड़ इक बंधन से…। 
एकहि रंग में नाता जोड़े 
सज्जन हो दिल से।  !! आज बाबाकी !! 
__________________( ग्रूप )____
                                                             
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