श्री साईं कथामृत
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सुनो-सुनो श्री साई के गुण ,
सीख सबूरी , श्रद्धा की ,
सुन इनकि महिमा चमतकार की
भरी कहानी , प्यार की ॥
शिरिडी गांव में छोटासा इक
बालक बैठा छाँव में
नीम -व्रुक्ष की छायाथा , वो
बड़ी मग्न , तप भाव में
देखने लगे शिरिडी वासी निस-दिन
सुबह-और शाम में
खाना -पीना पूछता नहीं
आँख खोल कुछ बोलता नहीं ॥ सुनो ॥
बोलो सांई राम , बोलो सांई श्याम
शरण में आओ सख ,सब बंधू
शिरिडी उनके धाम ॥
पूजारीके स्वप्न में जोभी
बोले भगवन खंडोबा
खोद के धरती देखा ,सुन्दर
कमरा एक उजालासा
तप; कार्य की जगह था वो , ओर
जोगी बालक रूपीथा
बालक नहि भगवंता है , ये
बड़ी खुशीकी बात थी ॥ बोलो साईं राम। ……
इक दिन बालकदृस्य होगया
पूरा गाँव हताश था ।
सालों -सॉल गुजरगये पर
वापस नहीं वो आयेथे ।
बीते दिन को भूलगये सब
अपने काम में मस्त थे
संत -जनोकी बात बड़ी है
जानेना क़ोई , जवाब न था ॥ बोलो साई राम। ....
धूप-गाँव में चाँदपाटील
अपने घोड़ा जो खोये ।
ढूंढने लगे सारादिन , और
परेशान से ओ रोये ।
साधू रूपी संत बताया
उसी जगामे घोड़ा था ।
मन ही मनमे चकित हुवा और
भरी खुशी से नमन किया ॥ बोलो साई राम ----
सिद्ध -पुरुष महिमाको जाने
पाटिल , साधू सच्चा था ।
अतिथि रूप सादर से लाने
सोचा , मनकी इच्छाथा ।
बात मानकर निकले साँई
धन्य पाटील जन्म था ।
सांई चरण जो पडी गांवमें
पावन द्वारकमाई था ॥ बोलो साई राम ---
चारों ओर फैलाथा महिमा
सांई के गुण -गान का ।
भक्त जनोसे भरी साई - दरबार
मंदिर व हि मश्चिद् था ।
हिंद , मराठी ,सिक्क , इसाई
सब मिल शरण में आतेथे ।
भेद-भाव नहि किया साईने
सब मत को अपनाया था ॥ बोलो साई राम ----
खण्ड -योग के सिद्धी पायी
साई संत फकीर थे ।
भरी आग में हाथ डाल , देतेथे
विभूति भगवंता ।
निस-दिन जलती धुनिकी विबूदी
रोग निवारक साधन था।
कष्ट मिटाकर करुण दिखाकर
साई सद्गुरु हसते थे ॥ बोलो साई राम---
पानीसे वो दीप जलाके
चमतकार दिखलाताथा ।
नमक भरी पानीको छूकर
मीठा नीर बनाताथा ॥
दान-धर्म कर दया दिखाकर
पावन पालन करताथा ।
छत पे झूला बाँधके बाबा
बड़े आरामसे सोताथा॥ बोलो साई राम---
चक्की में गेंहू को पीसके
सबका पाप धुलाताथा ।
कुष्ट रोग , कलरा ,बुखार
बूदीसे ठीक वो करताथा ।
प्लेग -रोग को रोकने बाबा
आटा गाँवमे छिडकताथा ।
राजभोगि , बैरागी बनकर
भीख मांगके खाताथा॥ बोलो साई राम----
बाईजाबाई-मय्या ,तात्या
आत्माराम और बापाजी
दासगणू , कपर्दी , पाटिल
सब साई के भक्त थे ।
उनके नजर में सांई रक्षक
मात-पिता , गुरु , संत थे ।
प्यार भरोसा रखवालोंकी -
बाबा सच्चे साथी थे ॥ बोलो साई राम --
साई महिमापरम्पार है
मायी द्वारक तीर्थ बनी ।
शिरिडी क्षेत्र की दरसन कर लो
गोरे , काले , गरीब , धनी
साई चरण में गंगा -जमुना
तीर्थ बहे पावन है जनी ,
मानव रूपमे माधव बनकर
मन जीते साई धनी ॥ बोलो साई राम---
महिमा बड़ी सांई कि , धन्य हम
सारे जन -गण धरती का
धन्य हुयी राधाकृष्ण माई
संस्थान बनाया साईका
शिरिडी में स्थापित हुई मूर्ती
साईकी -सद्गुरुजीकी
मंगलमूरत महिमा भरी पुरि
गूँज उठें जयकार की ॥ बोलो सांई राम---
सांई उत्सव शुरू हुवा तब
भरी चावड़ी रोशनसे
शोभायात्रा चावडि पहुंचा
सब थके भूख और प्यास से
अन्नदान तब किया साई ने
खुद अपनेही हाथोंसे
ग्यारह सूत्र की गीता महिमा
कहा सांई बड़ी प्यार से ॥ बोलो साई राम ----
नवनिधि दाता नो सिक्कोंमें
बांटके भक्ती -भाव के रंग
बूटीभवन में समाधि-इच्छा
प्रकटकिया सब साथी संग
आँख मूँदकर , छोड़ शरीर को
ली समाधि साँई के अंग
समाधि में से बोले सांई
सदा रहेंगे हमारे संग ॥ बोलो सांई राम -----
अखिलकोटि ब्रह्माण्ड नायका
सकल पाप हर सात संता
राज राज श्री योगिराज -
परब्रह्म साँई श्री गुणवन्ता
समर्थ सद्गुरु साईनाथ के
शरण में आवो सब संता
जै बोलो मंगलमूरत को
साँई नरायण भगवन्ता ॥ बोलो साँई राम-----
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मङ्गलं आरती
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मंगलम् श्री साइनाथ
मंगलम् श्री दीननाथ
मङ्गलाकार सांई
सर्व मङ्गला ॥
द्धारका पुरि निवास
नारदादि पूजितेस
निर्मलानन्द रूप
नित्य मङ्गला ॥
शिरिडि क्षेत्र पुरपावन
सर्वधर्म सम भावन
सकल लोक सुख कामन
सांई मङ्गला ॥
राजाधिराज अखिल
ब्रह्माण्ड नायकाय
कोटिजन सुपूजिताय
भूरि मङ्गला ॥
सर्व रोग हर शुभाय
नित्याग्निहोत्र जनित
पावन बाभूति भूष
सर्व मङ्गला ॥
लोक-शोक नाशकाय
सार-सुम सु पूजिताय
सौम्य रूप सत्य पाल
शान्ति मंगलम् -साई
शान्ति मंगलम -साई
शान्ति मङ्गलम् ॥
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मङ्गलं आरती
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मंगलम् श्री साइनाथ
मंगलम् श्री दीननाथ
मङ्गलाकार सांई
सर्व मङ्गला ॥
द्धारका पुरि निवास
नारदादि पूजितेस
निर्मलानन्द रूप
नित्य मङ्गला ॥
शिरिडि क्षेत्र पुरपावन
सर्वधर्म सम भावन
सकल लोक सुख कामन
सांई मङ्गला ॥
राजाधिराज अखिल
ब्रह्माण्ड नायकाय
कोटिजन सुपूजिताय
भूरि मङ्गला ॥
सर्व रोग हर शुभाय
नित्याग्निहोत्र जनित
पावन बाभूति भूष
सर्व मङ्गला ॥
लोक-शोक नाशकाय
सार-सुम सु पूजिताय
सौम्य रूप सत्य पाल
शान्ति मंगलम् -साई
शान्ति मंगलम -साई
शान्ति मङ्गलम् ॥
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साँई पञ्चारती
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मङ्गलं श्री सांईनाथ
मधुर भाषिता। ....
आकार-निराकार
अखिलपालका। ……
मंगलम् श्री सांई तेज
अखिलपोषका। …
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मङ्गलं श्री सांईनाथ
मधुर भाषिता। ....
आकार-निराकार
अखिलपालका। ……
मंगलम् श्री सांई तेज
अखिलपोषका। …
निराधार के आधार
नित्य निर्मला…।
मंगलम् श्री साईनाथ
शिरिडि श्रीकरा। …
सत्गुरू -संत रूप
श्री महेश्वरा…
मङ्गलम् श्री सांईनाथ
द्वारकेस्वारा। …
आर्तत्राण-परायणा
अभयदायका....
मङ्गलम् श्री सांईनाथ
मोक्ष साधका। … मात्र
श्रद्धा-सबूरी , भक्ति
मुक्ति दायका…॥ मङ्गलम् ॥
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नित्य निर्मला…।
मंगलम् श्री साईनाथ
शिरिडि श्रीकरा। …
सत्गुरू -संत रूप
श्री महेश्वरा…
मङ्गलम् श्री सांईनाथ
द्वारकेस्वारा। …
आर्तत्राण-परायणा
अभयदायका....
मङ्गलम् श्री सांईनाथ
मोक्ष साधका। … मात्र
श्रद्धा-सबूरी , भक्ति
मुक्ति दायका…॥ मङ्गलम् ॥
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