। भजन गीत।
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गणपती गणपति - मोहे तुम गति
देयि सुमति -करू मै तेरी स्तुती ॥ गणपति ॥
तुम बिना।।।।। क़ाज नहीं होना
मै ने नहीं जाना , मै मूरख था ना ॥ तुम ॥
लम्बोदर ना ना , रूठ ना जाना
मोदके लाना , प्रेम से तुम खाना ॥ लंबोदर ॥
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भजो राधे -गोविंद -भजो
जसोदा के नन्द। ....
देवकी नन्द-नन्दन
गोपाला। हे … ॥ भजो ॥
हरी राधा के अंग -,
गोपिकावों के संग
रास-लीला रचे
ब्रिज-बाला हां ....... ॥ भजो ॥
मोर -मुकुटंन के धार , कान्हा
माखन का चोर , मेरा
जीवन का डोर , गोपाला
प्रभु दीनजन -बंधु , सबका
दुःख करे भांग , जग में
माया के रंग , गोपाला। …
जग में माया के रंग
गोपाला… हां ॥। भजो ॥
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नाचे नाचे रे गणपती
नंदलाला हे नंदलाला
तूही चल जल्दी छोड़
दूध के प्याला…
पावों मे घुंगरू
कद से छोटे गुरू
छोटी छोटीसी नैनन के
गज मुख बाला ॥ नाचे ॥
मूषक जी निकल पड़े
सज-धज के , राय
गणपति कि नाचन में
ढोल बजाने…
ना शक- संकोच बिना
फन को फैलाके
काला नाग चली नागिन संग
पुंगी बजाने। …
आया है चाँद , प्यारी
सखियों के संग
सब सितारों ने चमक लाई
आँगन में ॥ नाचे ॥
सोनेकी थाली में
सूंढ़ घुमाके ………
चलें गणपती स्फूर्ती से
लड्डु चुराने । ....
घन-काया ,गण-राया
चुप के छुपाके। …
भागें भक्तों की थालिमे -
मोदक को चुराके…।
नाच ने की ढंग
बालपन की ये रंग
प्यारा - प्यारा सा लगेरे
सब के नयनन को ॥ नाचे ॥
चोरी के मामले में
तूभी क्या कम …
हमरि नजरों में दोनोंकी
कारनामें सम। ....
हारे है हम पूरे
शहर , पूरा गाँव
नन्द -लाला और गणपती कि
देख बालपन…
नट-खट प्यारे
नन्द लाला न्यारे
बाळ गणराया तुमरि साया
चाहेरे हरदम ॥ नाचे ॥
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गणपती गणपति - मोहे तुम गति
देयि सुमति -करू मै तेरी स्तुती ॥ गणपति ॥
तुम बिना।।।।। क़ाज नहीं होना
मै ने नहीं जाना , मै मूरख था ना ॥ तुम ॥
लम्बोदर ना ना , रूठ ना जाना
मोदके लाना , प्रेम से तुम खाना ॥ लंबोदर ॥
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भजो राधे -गोविंद -भजो
जसोदा के नन्द। ....
देवकी नन्द-नन्दन
गोपाला। हे … ॥ भजो ॥
हरी राधा के अंग -,
गोपिकावों के संग
रास-लीला रचे
ब्रिज-बाला हां ....... ॥ भजो ॥
मोर -मुकुटंन के धार , कान्हा
माखन का चोर , मेरा
जीवन का डोर , गोपाला
प्रभु दीनजन -बंधु , सबका
दुःख करे भांग , जग में
माया के रंग , गोपाला। …
जग में माया के रंग
गोपाला… हां ॥। भजो ॥
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नाचे नाचे रे गणपती
नंदलाला हे नंदलाला
तूही चल जल्दी छोड़
दूध के प्याला…
पावों मे घुंगरू
कद से छोटे गुरू
छोटी छोटीसी नैनन के
गज मुख बाला ॥ नाचे ॥
मूषक जी निकल पड़े
सज-धज के , राय
गणपति कि नाचन में
ढोल बजाने…
ना शक- संकोच बिना
फन को फैलाके
काला नाग चली नागिन संग
पुंगी बजाने। …
आया है चाँद , प्यारी
सखियों के संग
सब सितारों ने चमक लाई
आँगन में ॥ नाचे ॥
सोनेकी थाली में
सूंढ़ घुमाके ………
चलें गणपती स्फूर्ती से
लड्डु चुराने । ....
घन-काया ,गण-राया
चुप के छुपाके। …
भागें भक्तों की थालिमे -
मोदक को चुराके…।
नाच ने की ढंग
बालपन की ये रंग
प्यारा - प्यारा सा लगेरे
सब के नयनन को ॥ नाचे ॥
चोरी के मामले में
तूभी क्या कम …
हमरि नजरों में दोनोंकी
कारनामें सम। ....
हारे है हम पूरे
शहर , पूरा गाँव
नन्द -लाला और गणपती कि
देख बालपन…
नट-खट प्यारे
नन्द लाला न्यारे
बाळ गणराया तुमरि साया
चाहेरे हरदम ॥ नाचे ॥
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